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 चश्मा उतरा जा सकता है चश्मा उतारने के तरीके 2018 icl, Lasik ,Contact Lens,Lasik Laser:-LASIK, or “laser-assisted in situ keratomileusis,”

is the most commonly performed laser eye surgery to treat myopia (nearsightedness)Implantable Collamer Lens (ICL) – For Long Term Corrections. … ICL, also very commonly referred

                                            ICL and LASIK Surgery 

बहुत से लोगो को बस ये पता है की बस लेसिक लेजर द्वारा ही चश्मा उतरा जा सकता है , पर समय के साथ साथ बहुत से नयी तकनीक भी विकशित होती है

जिनके बारे में हमें जानना चाहिए , आज के समय में परमानेंट चश्मा उतरने के दो तरीके है ,

पहला तो आप सभी जानते ही है लेसिक लेजर जिसमे लेजर की सहायता से चश्मा उतरा जाता है , और दूसरा ICL की विधि द्वारा चश्मा उतरा जाता है इसके बारे में बहुत कम लोगो को पता है 

जोकि बाहर से बड़ा नही होता बल्कि की अंदर से बड़ा होता है , जो आगे से दिखाई नही देता है , जब ये बड़ा हो जाता है तो लाइट का फोकस पूरी तरीके से परदे पे नही पहुँचती

लाइट को परदे पे डालने के लिए या तो हम चश्मे का प्रयोग कर सकते है या कांटेक्ट लेंस का प्रयोग कर सकते है

या लेजर की विधि द्वारा कलि पुतली के  घुमाव को ठीक कर के और उसकी मोटाई कम कर के ठीक कर सकते है , या आँख के अंदर लेंस दाल के ठीक किया जा सकता है , जिसे लोगो को सही विज़न मिलती है I

                            चश्मा उतारने के तरीके :-

  • चश्मा टेम्परेरी हैI

  • कॉन्टेक लेंस भी टेम्परेरी हैI

  • लेसिक लेजर परमानेंट हैI

     ICL क्या है ?

 ICL का पुराना नाम implantable Contact Lens है , मतलब ये एक प्रकार का कॉन्टेक लेंस है जो की आँख के ऊपर नही पहना जाता है , बल्कि आँख के अंदर डाला जाता है 

ज्यदा प्रशिद्ध होने के बाद इसका नाम बदल के implantable Contact Lens कर दिया गया है , ICL को एक और भी नाम से जाना जाता है evo visian icl ज्यदा तर लोग ICL को EVO के नाम से जानते है I

     Lasik Laser क्या है ?

लेसिक लेजर में हम काली पुतली को तराश के उसका घुमाव बदल के आँख का फोकस परदे पे करवाते है कोर्निया की  अपनी एक मोटाई होती है 

लेसिक लाजर हम काली पुतली के ऊपर से tissue remove कर के उसको पतला कर देते है

एक सामान्य कोर्निया में 8 नंबर तक का चश्मा उतरा जा सकता है इसे ज्यादा करने पर हमें सेफ्टी और क्वालिटी देखने को नही मिलती यही कारण है की 8 नंबर से उपर हम लेसिक लेजर को सही नही मानते है I 

इस स्तिथि में हम ICL का प्रयोग करते है , ICL में हम सोनिया को बिना टच किये एक micro incision की सहायता से ICL जो की एक सॉफ्ट लेंस की तरह होता है

आँख के अंदर डालते है I जो हमारे natural लेंस ऊपर जा के सेट होता है , नेचुरल लेंस को बिना टच किये I

                      ICL Lasik से बेहतर तकनीक क्यों है ?

  • इसमें कोर्निया का कोई tissue remove नही किया जाता , और न ही कोर्निया को टच किया जाता हैI 

  • लेसिक में tissue removeकरने का बाद DRYNESS की समस्या आ सकती है लेकिन ICL में हमने कोर्निया को टच नही किया तो ये समस्या भी नही आती है I 

  • Recovery ICL में instent है1 

  • Vision Quality ICL में लेसिक के मुकाबले बहुत अच्छी है I 

  • ICL की सहायता से एक बार में लगभग 18 नंबर तक का चश्मा उतरा जा सकता है , जाकी लेसिक लेजर में लगभग 8 नंबर तक का चश्मा ही उतरा जाना ठीक माना जाता है I ये सभी ICL के फायदे है I

                        ICL की लाइफ :-

वैसे तो ICL की लाइफ पूरी लाइफ  लॉन्ग होती है , इसका प्रयोग लगभग 15 सालो से किया जा रहा है

अबतक ऐसा को भी CASE नही मिला जो की ICL की लाइफ को इफ़ेक्ट करता हो तो हम मान सकते है की ICL की लाइफ पूरी लाइफ टाइम के लिए होती है I 

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